Q-A Ch-1 प्राकृतिक चिकित्सा दर्शन

प्राकृतिक चिकित्सा दर्शन – प्रश्न उत्तर

प्राकृतिक चिकित्सा दर्शन

भाग A : 50 शब्दों में उत्तर (5 प्रश्न)

1. प्राकृतिक चिकित्सा क्या है?
प्राकृतिक चिकित्सा प्रकृति पर आधारित एक जीवन पद्धति है। इसमें पंच तत्वों के संतुलन द्वारा शरीर की जन्मजात जीवनी शक्ति को सक्रिय किया जाता है। यह औषधियों के स्थान पर प्राकृतिक साधनों से शरीर की शुद्धि कर स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल देती है।
2. प्राकृतिक चिकित्सा को जीवन विज्ञान क्यों कहा जाता है?
प्राकृतिक चिकित्सा केवल रोगों का उपचार नहीं करती, बल्कि सही खान-पान, रहन-सहन, विश्राम और प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन जीने की कला सिखाती है। इसी कारण इसे जीवन विज्ञान कहा जाता है।
3. पंच तत्वों का स्वास्थ्य से क्या संबंध है?
मानव शरीर पंच तत्वों से बना है। इन तत्वों का संतुलन रहने पर शरीर स्वस्थ रहता है। इनमें असंतुलन होने पर रोग उत्पन्न होते हैं। प्राकृतिक चिकित्सा इन तत्वों के संतुलन पर आधारित है।
4. जीवनी शक्ति से क्या अभिप्राय है?
जीवनी शक्ति शरीर की जन्मजात शक्ति है, जो रोगों से लड़ने और शरीर को स्वयं ठीक करने की क्षमता रखती है। प्राकृतिक चिकित्सा इस शक्ति को सक्रिय कर रोग निवारण में सहायता करती है।
5. प्राकृतिक चिकित्सा की मुख्य विशेषता लिखिए।
प्राकृतिक चिकित्सा सरल, सस्ती और हानिरहित है। इसमें शोधक, शामक और पूरक गुण पाए जाते हैं। यह रोग की जड़ पर कार्य कर स्थायी स्वास्थ्य प्रदान करती है।

भाग B : 100 शब्दों में उत्तर (5 प्रश्न)

6. प्राकृतिक चिकित्सा दर्शन को समझाइए।
प्राकृतिक चिकित्सा दर्शन प्रकृति के नियमों पर आधारित है। इसके अनुसार मानव शरीर में स्वास्थ्य और रोग का संबंध पंच तत्वों के संतुलन और असंतुलन से है। यह चिकित्सा औषधियों पर निर्भर न रहकर शरीर की जन्मजात जीवनी शक्ति को सक्रिय करती है। प्राकृतिक साधनों जैसे जल, वायु, सूर्य प्रकाश, उपवास और प्राकृतिक भोजन के माध्यम से शरीर से विषैले द्रव्यों को बाहर निकाला जाता है। इसका उद्देश्य केवल रोग हटाना नहीं, बल्कि व्यक्ति को स्वस्थ, संतुलित और आनंदमय जीवन जीने की पद्धति सिखाना है।
7. प्राकृतिक चिकित्सा में रोग उत्पत्ति और निवारण की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार रोग किसी बाहरी जीवाणु से नहीं, बल्कि शरीर में संचित विजातीय द्रव्यों और पंच तत्वों के असंतुलन से उत्पन्न होते हैं। जब प्राकृतिक नियमों का उल्लंघन होता है, तब शरीर की जीवनी शक्ति कमजोर पड़ जाती है। प्राकृतिक चिकित्सा प्रकृति की सहायता से शरीर की शुद्धि कर जीवनी शक्ति को पुनः सक्रिय करती है। इससे शरीर स्वयं रोगों से लड़ने में सक्षम बनता है और स्थायी स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
8. प्राकृतिक चिकित्सा के शोधक, शामक और पूरक गुणों की व्याख्या कीजिए।
प्राकृतिक चिकित्सा में तीन प्रमुख गुण पाए जाते हैं। शोधक गुण के अंतर्गत शरीर से विषैले और विजातीय द्रव्यों का निष्कासन किया जाता है। शामक गुण रोग की अवस्था में शरीर को शांति और आराम प्रदान करता है। पूरक गुण के माध्यम से शरीर को आवश्यक पोषण और ऊर्जा मिलती है। इन तीनों गुणों के संयुक्त प्रभाव से रोग का स्थायी निवारण संभव होता है।
9. महात्मा गांधी के विचारों के अनुसार प्राकृतिक चिकित्सा का महत्व लिखिए।
महात्मा गांधी के अनुसार प्राकृतिक चिकित्सा केवल रोग मिटाने की विधि नहीं, बल्कि जीवन जीने की सही पद्धति है। उनका मानना था कि प्राकृतिक जीवन अपनाने से तन और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं। प्राकृतिक चिकित्सा व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है और रोग के बाद भी स्वस्थ जीवन जीने का मार्ग दिखाती है। यह चिकित्सा आम जनता के लिए सरल, सुलभ और उपयोगी है।
10. प्राकृतिक चिकित्सा को आधुनिक युग में क्यों आवश्यक माना जाता है?
आधुनिक जीवनशैली में तनाव, प्रदूषण और असंतुलित भोजन के कारण रोग बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में प्राकृतिक चिकित्सा अत्यंत आवश्यक हो गई है। यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाकर रोगों से बचाव करती है। दुष्प्रभाव रहित होने के कारण यह चिकित्सा सुरक्षित है। प्राकृतिक चिकित्सा व्यक्ति को प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

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