QA Hindi ch 1,paper 5
50 शब्दों के उत्तर वाले प्रश्न
1. “जैसा आहार वैसा मन” – इस पुरातन विचार को समझाइए।
इस पुरातन विचार के अनुसार भोजन का सीधा प्रभाव मन पर पड़ता है। शुद्ध, सादा और प्राकृतिक भोजन मन को शांत और पवित्र बनाता है, जबकि अशुद्ध और भारी भोजन से चिड़चिड़ापन और नकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के लिए शुद्ध आहार आवश्यक है।
2. “लघु आहार परम औषधि” का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
इस कथन का अर्थ है कि हल्का, सादा और सीमित भोजन शरीर को स्वस्थ रखता है। अधिक भोजन करने से पाचन तंत्र पर भार पड़ता है, जबकि लघु आहार रोगों से बचाता है और शरीर की प्राकृतिक उपचार शक्ति को बढ़ाता है।
3. हकीम लुकमान का भोजन के बारे में क्या विचार था?
हकीम लुकमान के अनुसार रोगों का मुख्य कारण अनुचित और अधिक भोजन है। उन्होंने कहा कि नियंत्रित और सही समय पर भोजन करने से स्वास्थ्य बना रहता है, जबकि अधिक भोजन करने से अनेक रोग उत्पन्न होते हैं।
4. भोजन और भूख के बारे में आधुनिक विचार लिखिए।
आधुनिक विचारों के अनुसार भोजन तभी करना चाहिए जब वास्तविक भूख लगे। बिना भूख के भोजन करना शरीर के लिए हानिकारक है और पाचन बिगाड़ता है। भूख को भोजन का सही संकेत माना गया है।
5. “आवश्यकता अनुसार भोजन” का भाव स्पष्ट कीजिए।
इस विचार का अर्थ है कि भोजन शरीर की आवश्यकता के अनुसार करना चाहिए, न कि स्वाद या इच्छा के अनुसार। जितनी मात्रा और जिस प्रकार का भोजन शरीर को चाहिए, उतना ही स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
100 शब्दों के उत्तर वाले प्रश्न
6. पुरातन आहार सम्बन्धी विचारों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
पुरातन आहार सम्बन्धी विचार शुद्धता, संयम और संतुलन पर आधारित हैं। “जैसा आहार वैसा मन” जैसे कथनों से भोजन और मानसिक स्थिति का गहरा संबंध बताया गया है। पुरातन काल में यह माना जाता था कि शुद्ध भोजन से मन और विचार शुद्ध होते हैं। कम भोजन करने और पेट में जल व वायु के लिए स्थान छोड़ने की सलाह दी जाती थी। लघु और सादा भोजन को सर्वोत्तम औषधि माना गया। अधिक भोजन को रोगों का कारण बताया गया। इस प्रकार, पुरातन विचार आत्मसंयम और प्राकृतिक जीवन शैली पर जोर देते हैं।
7. आधुनिक आहार सम्बन्धी विचारों को समझाइए।
आधुनिक आहार सम्बन्धी विचार भूख, पाचन और व्यवहारिक जीवन पर आधारित हैं। इनके अनुसार भोजन तभी करना चाहिए जब वास्तविक भूख हो। समय देखकर या आदत के अनुसार भोजन करना हानिकारक माना गया है। आधुनिक विचारों में अधिक भोजन को स्वास्थ्य का सबसे बड़ा शत्रु बताया गया है। यह भी कहा गया है कि खिलाने वालों को दोष देने के बजाय खाने वालों की आदतों में सुधार होना चाहिए। इस प्रकार आधुनिक विचार जागरूक और नियंत्रित भोजन पर बल देते हैं।
8. विदेशी आहार सम्बन्धी विचारों का वर्णन उदाहरण सहित कीजिए।
विदेशी विचारकों ने भोजन को औषधि के रूप में माना है। “What you eat is your medicine” कथन से भोजन की उपचारात्मक शक्ति को दर्शाया गया है। भूख को “सबसे उत्तम चटनी” कहा गया, अर्थात भोजन तब ही स्वादिष्ट और उपयोगी होता है जब भूख हो। “तरल को चबाओ और ठोस को पियो” का अर्थ भोजन को अच्छी तरह चबाना और तरल को धीरे पीना है। सही आहार से डॉक्टर की आवश्यकता कम हो जाती है।
9. पुरातन एवं आधुनिक आहार सम्बन्धी विचारों की तुलना कीजिए।
पुरातन आहार सम्बन्धी विचार भोजन की शुद्धता और उसके मानसिक प्रभाव पर अधिक बल देते हैं, जबकि आधुनिक विचार भूख और पाचन पर केंद्रित हैं। पुरातन विचार नैतिकता और आत्मसंयम पर आधारित हैं, वहीं आधुनिक विचार वैज्ञानिक और व्यवहारिक हैं। दोनों ही अधिक भोजन को हानिकारक मानते हैं और नियंत्रित भोजन को स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताते हैं।
10. आहार सम्बन्धी विचार प्राकृतिक चिकित्सा को कैसे समर्थन देते हैं?
आहार सम्बन्धी विचार प्राकृतिक चिकित्सा का आधार हैं। प्राकृतिक चिकित्सा मानती है कि सही आहार ही सर्वोत्तम औषधि है। पुरातन, आधुनिक और विदेशी सभी विचार अधिक भोजन और गलत आदतों से बचने की शिक्षा देते हैं। वे भूख के अनुसार, आवश्यकता अनुसार और सादा भोजन करने पर बल देते हैं। इस प्रकार ये विचार प्राकृतिक चिकित्सा की मूल भावना – प्राकृतिक जीवन और आत्मनियंत्रण – को मजबूत करते हैं।
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